लॉकडाउन: प्रोडक्टिविटी की कमी और स्ट्रेस का ऐसे करें मुकाबला

लॉकडाउन ने लोगों के जीवन को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया है. कोई नहीं जानता ऐसा कब तक चलेगा. इसका प्रभाव हमारे कार्य की उत्पादकता पर पड़ रहा है और इससे संबंधित चिंताएं भी बढ़ रही हैं. विशेषज्ञों ने इस चिंता को कम करने के कुछ तरीके बताए हैं. वे यह भी कहते हैं कि कुछ लोग ऑनलाइन प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने के दावे करते हैं लेकिन यह जरूरी नहीं है कि वे आपके लिए भी लाभकारी हों.


अपने कार्य पर ध्यान केंद्रित करें अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और सीनियर डायरेक्टर लिन बुफका के मुताबिक इस कठिन समय के दौरान कुछ लोग अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकते हैं, जबकि अन्य उतने प्रेरित नहीं होते. ये दोनों प्रतिक्रियाएं सामान्य हैं. यह सभी को खुद से तय करना होगा कि वह किस प्रकार कार्य की उत्पादकता को बनाए रखते हैं. अच्छा होगा कि सभी अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें.


अपनी दिनचर्या तैयार करें बुफका कहती है कि दिनचर्या अधिकतर लोगों के लिए सहायक होती है. लेकिन इस समय हमारी दिनचर्या बदल गई है. महामारी ने लोगों की प्रोडक्टिविटी, टहलने का समय, कसरत करना और पढ़ने जैसी आदतों को बदल दिया है. इसलिए आप उन सभी चीजों और कार्यों का अनुसरण करें जो आपको सहज महसूस करने में मदद करती हों.अपनी तुलना न करें फाल्कनर आगे कहते हैं कि इस समय आप अपनी तुलना दूसरों से न करें. यह आपके लिए अहितकारी हो सकता है. आप जितनी जल्दी हो उतनी जल्दी खुद को शांत रखने की कोशिश करें. यह आपके कार्य के लिए मददगार साबित होगा.


सोशल मीडिया से दूरी बनाएं क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट जेमेका फाल्कनर ने कहा कि हर दिन सोशल मीडिया के इस्तेमाल को सीमित रखें. यह तरीका आपको सामाजिक तुलना कम करने में मदद करेगा. आपको यह तय करना है कि क्या सही है क्या गलत. सोशल मीडिया पर महत्वपूर्ण बातों पर गौर करें और अन्य बातों को नजरअंदाज करें. कोविड-19 से संबंधित सभी खबरों की सीमाएं तय करें